_"Philosophical revolution is pre-conditioning to social reformation"_
_— M. N. Roy_
બીપીનભાઈ શ્રોફ સાહેબે તેમના વ્યાખ્યાનની પૂર્ણાહુતિ એમ. એન. રોયના ઉપરોક્ત વિધાન દ્વારા કરી હતી. તેમણે વ્યક્તિ સ્વાતંત્ર્ય ના સંદર્ભમાં એમ. એન. રોયના વિચારો પર ઊંડાણપૂર્વક ચર્ચા કરી.
ત્યારબાદ મેં AI ને વિનંતી ( prompt ) કરી કે ઉપરોક્ત તમામ મુદ્દાઓને એક સુંદર કવિતામાં વણી લે. મેં એમ કહ્યું કે "માની લો કે તમે એમ. એન. રોય છો, તો આ તમામ મુદ્દાઓને તમે કવિતાના સ્વરૂપે કેવી રીતે રજૂ કરશો?"
ત્યારે AI દ્વારા નીચે મુજબની કવિતા રચવામાં આવી:
*"पहले मन का विद्रोह"*
*सुनो, ओ साथी!*
एम. एन. रॉय के स्वर में एक कविता —
*"पहले मन का विद्रोह"*
कानून बदल दो, तख़्त पलट दो,
पर मन वही पुराना रहा,
तो राजा जाएगा, दूसरा आएगा,
ज़ंजीर का नाम बस नया होगा।
पहले सोच की ज़ंजीर तोड़ो,
पहले बुद्धि का दिया जलाओ।
जब तक इंसान गुलाम है मन से,
आजादी कागज़ पर ही रह जाएगी।
*दर्शन का क्रांति* — यही नींव है,
समाज-सुधार की पहली सीढ़ी है।
ईश्वर के नाम पर डर बेचते हैं,
जाति के नाम पर फाँस बाँटते हैं,
रूढ़ि की राख में स्वप्न जलाते हैं —
इन सबको तर्क की आँधी चाहिए।
जब इंसान खुद को इंसान मानेगा,
न पुजारी, न सत्ता तय करेगी भाग्य,
जब विज्ञान आँख बनेगा, और विवेक पाँव,
तभी घर की दीवारें सच में हिलेंगी।
मार्क्स ने कहा — पहले अर्थ बदलो,
गांधी ने कहा — पहले आत्मा बदलो,
रॉय ने कहा — *पहले विचार बदलो,*
क्योंकि बिना विचार के बदला समाज,
रेत पर बना महल है।
तो उठो, सवाल करो,
शास्त्र से नहीं, स्व-विवेक से जियो।
पहले अपने भीतर क्रांति लाओ,
फिर बाहर दुनिया अपने आप बदल जाएगी।
*_क्योंकि समाज नहीं बदलता कानून से,
समाज बदलता है सोच से।_*
*और सोच बदलती है — दर्शन की क्रांति से।
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Philosophical Revolution is the precondition for any revolution,
social, political, economical. etc.. M.N. Roy.
By Prof Mihir Dave- Assist Prof English- Palanpur Commerce College.